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मुझे इन्तजार है

Posted On: 5 Mar, 2016 में

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क्या कोई राष्ट्रभक्त वकील आज सुप्रीम कोर्ट में 3 मार्च को जेएनयू में कन्हैय्या कुमार के दिए भाषण और दिल्ली हाई कोर्ट की जज प्रतिभा सिंह के दिए निर्णय तथा एक समाचार पत्र में जज महोदया के कार्टून पर विचार करने हेतु कोई जनहित याचिका दायर करेगा ?जिस प्रकार एक अख़बार ने जज महोदया का कार्टून बनाया है वह जज महोदया का कार्टून नही बल्कि देश की न्यायपालिका का भद्दा मजाक है ?एक महिला जज के दिए निर्णय से समाचार पत्र स्वामी और मुख्य संपादक सहमत या असहमत हो सकते हैं लेकिन कार्यरत पदासीन जज महोदया का कार्टून नही बनाया जा सकता क्योंकि कार्यरत पदासीन महिला जज का कार्टून प्रकाशित करना यौन शोषण की श्रेणी में आता है / विडंबना है कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस ज्वलंत विषय पर चुप है जबकि 8 मार्च को राष्ट्रीय महिला दिवस भी है / क्या कोई समाचार पत्र या चैनल भारत के संविधान से भी ऊपर है ,क्या मीडिया की आजादी का अर्थ यह है कि देश की न्यायपालिका का मजाक उड़ाया जाय और एक महिला जज का कार्टून प्रकाशित किया जाय ?शर्म आनी चाहिए उन पाठकों को भी जो ऐसे अख़बारों को पढ़ते हैं जिनके संपादक देश के संविधान और कानून व्यवस्था का उपहास उड़ाते हों ? अभिव्यक्ति की आजादी पर बड़े बड़े ब्लॉग लिखने वाले और प्राइम टाइम में बहस करने वाले बुद्धिजीवियों को देश के संविधान और न्यायपालिका का मजाक उड़ाने का लाइसेंस देने वाले मंत्रालय पर माननीय राष्ट्रपति महोदय को आख़िरकार अब कोई निर्णायक प्रावधान खोजना ही होगा क्योंकि जिस प्रकार की भाषा कन्हैय्या कुमार ने बोली है और जेएनयू के कार्यरत टीचर ने काश्मीर सम्बन्धी अपने विचार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा सार्वजानिक किये हैं उससे तो यही लगता है कि भारत को ख़तरा पाकिस्तान से नही बल्कि कुछ मीडिया घरानों से अधिक है क्योंकि कुछ मीडिया घराने लगातार भारत को अस्थिर करने का षड्यंत्र रच रहे हैं और यदि समय रहते इनका उपचार नही किया गया तो बहुत बड़ा संकट दस्तक दे रहा है / यूपी के जिला बुलंदशहर में भी एक महिला जिलाधिकारी की एक अख़बार के रिपोर्टर के साथ कुछ कड़वे वचनों का आदान प्रदान हुआ और जिलाधिकारी महोदया ने अख़बार रिपोर्टर के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया लेकिन प्रदेश के अग्रणी अख़बार ने एक बार भी उस महिला जिलाधिकारी का कार्टून नही छापा लेकिन कन्हैय्या कुमार के मसले में तो अख़बार का सीधा सीधा कोई मतलब नही था उसके बाबजूद महिला जज का कार्टून छापना आख़िरकार क्या सन्देश देता है ?मुझे इन्तजार है कि क्या मीडिया लोकपाल एक महिला जज के कार्टून छापने वाले अख़बार के विरुद्ध कोई कार्यवाही करेगा ?
रचना रस्तोगी

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