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संपन्न दलित आरक्षण छोड़ें

Posted On: 2 May, 2015 Others में

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संपन्न दलित आरक्षण छोड़ें
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जनवरी 2015 से भारत के प्रधानमंत्री भारतीय जनता से बार बार यह अपील कर रहे हैं कि साधन संपन्न परिवारों को रसोई गैस सब्सिडी छोड़ देनी चाहिए जिससे लगभग सौ करोड़ रुपियों के राजस्व हानि से निबटा जा सकता है और यह धन गरीबों की भलाई में उपयोग हो सकेगा /पीएम की अपील पर कुछ धनाढय परिवारों ने रसोई गैस सब्सिडी त्याग भी दी है और यह धन कहाँ और कैसे उपयोग हुआ इसका लेखा जोखा पीएम साहब ने अभी तक नही बताया है / अपने चुनाव प्रचार समय से लेकर और सरकार गठन के ग्यारह महीने पूरे होने के बाद भी नरेंद्र मोदी अपने सम्बोधनों में दलित वंचित पीड़ित शोषित अलंकारों को बखूबी प्रयोग करते हैं / नेताओं के भाषणों में एक राजनीतिक पटकथा सी तैयार हो चुकी है कि आज भारत में जितने भी गरीब शोषित वंचित या पीड़ित हैं ,बस वे केवल दलित ही हैं जबकि 2015 में यदि वास्तविकता के धरातल पर बारीकी से अध्यन किया जाय तो सामान्य वर्ग के नवयुवक ही सबसे अधिक पीड़ित वंचित शोषित और प्रताड़ित होते दीखते हैं / आरक्षण का लाभ लेने वाले केवल शिडूल्य अनुसूचित जाति या जनजाति के ही लोग नही हैं बल्कि हर प्रकार से साधन संपन्न जैन ईसाई सिक्ख मुस्लिम बौद्ध यहूदी फ़ारसी भी अल्पसंख्यक केटेगरी का लाभ ले रहे हैं / और ओबीसी में तो एक भी पीड़ित वंचित शोषित व्यक्ति देखने को नही मिलेगा / खैर अगर पीएम साहब यदि संपन्न परिवारों से रसोई गैस सब्सिडी त्यागने की अपील कर सकते हैं तो आरक्षण का लाभ लेने वाले परिवारों से यह अपील क्यों नही कर सकते कि जिसने एक बार आरक्षण का लाभ लेकर उच्च तकनीकि शिक्षा या सरकारी नौकरी का अवसर भुना लिया तो अब उसके परिवार के अन्य सदस्यों या वंशावली को आरक्षण का लाभ नही लेना चाहिए ?भारत में जातिगत और धर्मगत आरक्षण की वजह से ही आने वाले समय में गृहयुद्ध होना सुनिश्चित है / आज जो लोग किसानों की आत्महत्या करने पर घडियालु आंसू बहाकर मीडिया में अपनी फोटुएं दिखा रहे हैं उन सबको इतना तो स्मरण होना ही चाहिए कि पूर्व पीएम विश्व नाथ प्रताप सिंह ने जब मंडल कमीशन लागु किया था तो हजारों प्रतिभावान योग्य नौजवानों ने इस मंडल कमीशन के विरोध में आत्मदाह किया था और यह उन्ही चीखों का परिणाम था कि वी पी सिंह पीएम कुर्सी से उतरने के बाद गुमनामी जिंदगी जीने को अस्तपतालों में जिन्दा रहने को विवश हो गए थे और इससे बड़े दुःख की बात और क्या होगी कि एक पूर्व सीएम और पूर्व पीएम की मृत्यु भी गुमनामी में खो गयी क्योंकि जिस दिन वी पी सिंह का देहांत हुआ था ठीक उसी दिन मुम्बई में 26 नवम्बर को आतंकी हमला हुआ था / पूरे भारत के लोगों ने मुम्बई हमले में मरने वालों को मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की लेकिन वी पी सिंह को किसी ने याद नही किया था /
एक तरफ तो भारत के पीएम स्किल इण्डिया की बात करते हैं और दूसरी ओर भारत की प्रतिभा योग्यता और दक्षता की निरंतर हो रही उपेक्षा ,पलायन और हत्या पर कोई संवदेना भी व्यक्त नही करते ? किसी पीड़ित वंचित शोषित गरीब का उत्थान करना या होना राजनीतिक कर्त्तव्य और राजधर्म भी है लेकिन इसकी आड़ में प्रतिभा योग्यता दक्षता के स्थान पर मूर्खता अयोग्यता और अपात्रता को प्रतिस्थापित करना भी राष्ट्रद्रोह है / वंचित शोषित पीड़ित अलंकारों को केवल दलित वर्ग के साथ विश्लेषण के रूप में प्रयोग करके नेतागण वास्तव में इन अलंकारों का अपमान कर रहे हैं क्योंकि वास्तविकता में जिनको पिछड़ा गरीब शोषित वंचित कहा जा रहा है उन सबके परिवारों का प्रत्येक सदस्य कहीं न कहीं किसी औद्योगिक घराने या प्रतिष्ठानों या घरों में घरेलु कार्य करने में संलिप्त है और प्रत्येक परिवार की औसतन मासिक आय कई हजार रूपया निकलेगी / आज साधारण मजदूर भी कम से कम चार सौ रूपया दैनिक पर आसानी से सुलभ नही है / जिन किसानों को आजकल राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है कभी उनसे ही पूछकर सत्यता बता दी जाय कि फसल बीज बुवाई और कटाई के लिए मजदूरों को एक वर्ष पहले ही एडवांस दिया जाता है और उस एडवांस को लेने के बाद भी मजदूर काम करने नही आते / दिवाली पर मिठाई ,ईंट भट्टों ,भवन निर्माण ,रंगाई पुताई बढ़ाई चिनाई और फैक्टरियों पर काम करने तथाकथित वंचित शोषित पीड़ित गरीब मजदूर एडवांस लेकर ही काम करते हैं और इनको काम पर रखने वाले न जाने कितने लोगों का पैसा ये तथाकथित मजदूर गरीब पीड़ित वंचित हजम कर जाते हैं ,उसका कोई आंकड़ा नही है और अगर काम देने वाला सख्ताई करे तो दलितों की राजनीति करने वाले इन तथाकथित गरीबों को रोजगार देने वालों का जीना हराम कर देते हैं / बड़ी बात क्या कहूँ कि घरों में झाड़ू पौंछा साफ़ सफाई करने वाली बाइयां तक अपनी टर्म कंडीशन पर काम करती हैं / इन तथाकथित पीड़ितों शोषितों वंचितों के यहाँ इंटरनेट मोबाईल टीवी फ्रिज से लेकर सारी सुविधाएँ इन्ही झोंपड़ियों तक में उपलब्ध हैं ,अस्थायी निवास होते हुए भी इनके पास वोटर आईकार्ड राशनकार्ड और अब आधारकार्ड तक भी हैं / बिना बिजली मीटर के भी इनकी झोंपड़ियां सरकारी बिजली से रोशन होती हैं लेकिन बिजली चोर केवल साधारण मध्यम वर्ग ही माना जाता है / पीएम साहब, रसोई गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील करते समय एक अपील अपने सांसदों विधायकों से संसद में केन्टीन में मुफ्त के से दाम पर सब्सिडी के रेट पर नाश्ता खाना खाने बंद करने की भी अपील करते तो जनता में एक अच्छा सन्देश जाता क्योंकि नेताओं के सब्सिडी भोजन का भार भारतीय करदाता ही वहन करता है /
मेरा मूल प्रश्न यही है कि जब पीएम महोदय साधन संपन्न परिवारों से रसोई गैस सबिसडी छोड़ने की अपील कर सकते हैं तो साधन संपन्न धनाढय आरक्षित वर्ग के लोगों से एक बार आरक्षण का लाभ लेने के बाद वंशानुगत आरक्षण का लाभ न लेने की अपील क्यों नही कर सकते ?
रचना रस्तोगी

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dr d k pandey के द्वारा
May 4, 2015

अच्छा लिखा प्रतिभा का बलिदान है आरछण. कुंठा और आक्रोश बढ़ाने का काम है आरछण.

jlsingh के द्वारा
May 3, 2015

इसकी शुरुआत भी ऊपर से ही करनी होगी … मध्यम वर्ग हमेशा पिसता है दो पाटों के बीच ..सबसे ज्यादा टैक्स भी यही मध्यम वर्ग देता है. अच्छा लिखा आपने!

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
May 2, 2015

केवल संपन्न दलित ही नहीं जिनको आरक्षण का लाभ मिल चुका हो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए /इस तरह आरक्षण का लाभ सभी दलित प्राप्त कर पाएंगे /


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