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rachnarastogi


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WHY NOT BOOTHLESS POLING

Posted On: 7 Dec, 2016  
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ई भाषणों पर भी विचार हो

Posted On: 6 Dec, 2016  
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रोचक ,सत्य और विचारणीय भी

Posted On: 13 Nov, 2016  
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रोचक ,सत्य और विचारणीय भी

Posted On: 13 Nov, 2016  
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प्रमाण नही लेकिन संभावना प्रबल

Posted On: 24 Sep, 2016  
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शोषित,पीड़ित,वंचित और दलित

Posted On: 25 Jul, 2016  
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शोषित,पीड़ित,वंचित और दलित

Posted On: 23 Jul, 2016  
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भारत पर मंडराता संकट

Posted On: 18 Jul, 2016  
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हिन्दुओं की हर जगह उपेक्षा

Posted On: 18 Jul, 2016  
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हिन्दुओं की हर जगह उपेक्षा

Posted On: 17 Jul, 2016  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

टॉप ब्लॉग में चुने जाने पर आपको बधाई ! आपने लिखा है कि रेल दुर्घटना में 150 लोग मर जाएँ तो मुआवजे में पुरानी करेंसी देकर पिंड छुड़ाया जाता है ! आपकी बात सही नहीं है, मुआवजा एक बड़ी रकम होती है, जो चेक से दी जाती है ! उन्हें हास्पिटल में चल रही कुछ पुरानी करेंसी दवा खरीदने हेतु दी गई थी ! आपने लिखा है कि नोटबन्दी की वजह से 105 लोग मर गए ! जयललिता के निधन पर 100 के करीब लोग मर गए ! दिल्ली और यूपी में डेंगू से कई सौ लोग मर गए ! मरने वाले अधिकतर लोग गरीब ही थे ! सीमा पर देश के लिए हमारे बहादुर सैनिक देश की रक्षा के लिए शहीद हो रहे हैं ! क्या देशहित के लिए हम थोड़ा सा भी त्याग नहीं कर सकते ? धिक्कार है मौज मस्ती से भरे स्वार्थी जीवन और स्वार्थी सोच पर ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम रचना जी बहुत सुन्दर तथ्यों से पूर्ण इस देश में लगता दलितों और मुसलमानों के लिए कोइ कानून नहीं एक दलित झूठी शिकयत कर दे को ऑटो सूचक शब्द इस्तेमाल किये बस पुलिस परेशान करना शुरू हो जाता.इसीवजह से दफ्तरों और संस्थानों में काम टीक से नहीं होता आप इन लोगो से कुछ नहीं कह सकते iitकानपूर के निर्देशक ने किसी कर्मचारी को कुछ काम न करने में कुछ कह दिया बस पुलिस में रिपोर्ट लिखवा दिया की जाती सूचक शब्द इस्तेमाल किये हमारे यहा कानून इतने ख़राब की उनका दुर्प्र्योग हो जाता उर्रार प्रदेश में एक कमलेश तिवारी ने कुछ कह दिया एक मुस्लिम नेता के जवाब में पुरे देश में प्रदर्शन और तोड़फोड़ कमलेश तिवारी जेल में मुस्लिम नेता मौज कर रहे इसीलिये हम लोग पीछे है इससे समाज में सहरसता नहीं आ सकती ऐसे में देश का नुक्सान होता और नेता मौज करते.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीया रचना जी, सादर अभिवादन! मैंने भी यही सोचा था, देश बदल रहा है. मेरा ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल कराना है. वैलिड डेट से १२ दिन पहले जमा किया था, (सेवाशुल्क के साथ.... ) २५ दिन होने को आ गए हैं, अभी तक फोटो खिंचवाने का नंबर नहीं आय. प्रतिदिन खबर ले रहा हूँ, आश्वासन मिल रहा है, हो जाएगा... भाजपा शासित राज्य है, यहाँ सिटीजन चार्टर भी लागू है, नियमानुसार एक सप्ताह के अंदर रिन्यूअल हो जाना चाहिए था.... पर अब तो कहीं भ्रष्टाचार भी नहीं है... सभी काम सुचारु रूप से चल रहा है... मैं बिना वैलिड लाइसेंस के गाड़ी चला रहा हूँ, पता नहीं कब ट्रैफिक पुलिस से सामना हो जाय और लेने के देने पद जाएँ! और भी बहुत सारी बातें हैं. दुसरे देश वालों को वीसा मुफ्त मिल जाएगा ...अपने देश वाले पासपोर्ट बनवा कर देखें, कितने दिन बाद और कितनी घूस देने के बाद बनती है? बस हम लोग अपनी भड़ास निकल सकते हैं, और कुछ नहीं. भारत माता की जय तो बोलना पड़ेगा न! सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आपका दर्द समझ रहा हूँ रचना जी । मूल समस्या देशवासियों के चारित्रिक पतन की है । सही व्यक्ति प्रत्येक स्थान पर अल्पमत में आ जाते हैं, प्रायः एकाकी पड़ जाते हैं और चहुँओर का वातावरण उन्हें मनुष्य की तरह जीने भी नहीं देता । ऐसे में यही लगने लगता है कि सही होना ही ग़लत है, अच्छा होना ही बुरा है । क्या करें ऐसे में ? केवल स्वयं को ही ठीक रख सकते हैं और अपने मन को दिलासा दे सकते हैं लेकिन औरों की बुराई से तो समझौता करना ही पड़ता है क्योंकि जीना तो इसी समाज में है । सब कुछ छोड़कर हिमालय की कन्दराओं में तो नहीं जाया जा सकता । और जाना भी चाहें तो अब तो शायद उनके माध्यम से पैसा कमाने वाले हमें वहाँ भी नहीं जाने देंगे ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: rachnarastogi rachnarastogi

रचना जी बहुत सुन्दर लेख ,किंतु यह भारत है ।यहां यह सब नहीं सोचा जा सकता जो दवायें अन्य देशों मैं प्रतिबन्धित होती हैं वे यहां धडल्ले से विकती हैं ।मरीज की हिस्ट्री रखना यहाॅ संभव नहीं हो पाता ।एक साधारण आदमी डाक्टर बदलता रहता है । मरीज की मानसिकता पर ध्यान दे पाना संभव नहीं हो पाता । मरीज को स्वयं ही संयमित होना पडता है । जो धनवान लोग हैं वे ही नित्य डाक्टरों के संपर्क मैं रहते दवाओं के साइड एफेक्ट के शिकार अधिक होते हैं । ऱाजनीति ही इस क्षेत्र पर हावी रहती है ।इन सब पर विचार करके ही सुप्रीम कोर्ट ने नीट लागु किया किंतु राजनीति व्यवसाइयों की गुलाम होती है अतः इस फैसले को अध्यादेश से भंग कर दिया गया ।दुनियाॅ की हर दवा विना साइड एफेक्ट के नहीं होती । इस लिए डाक्टर की भक्ति भाव से स्तुति करते विस्वास जगाकर ही इलाज करवाना चाहिए ।आधा रोग तो विस्वास से ही ठीक हो जाता है ।इस लोक मैं भगवान ,नमो और डाक्टर की भक्ति ही भवसागर से पार लगा सकती है ।जिसको यह ज्ञान हो जाता है उसे ही ओम शांति शांति होती है ।

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

आदरणीया रचना रस्तोगी जी, सादर अभिवादन! जब हमारे पास श्री मोदी जी जैसा विश्व में डंका बजानेवाला सर्वशक्तिमान मौजूद हैं, उनके चाणक्य अमित शाह विराजमान हैं, फिर हम सभी को इस छोटे से कन्हैया से डर क्यों लग रहा है. मुझे लगता है कि आप सभी बेवजह उसे हीरो बनाये जा रहे हैं. मीडिया और विपक्ष का वह हथियार हो सकता है, आप सभी इतना चिंतित क्यों हैं? इतना चिंतित तो शायद कभी इंद्र भी न रहे हों अपने सिंहासन को हिलता देख. आपके पास न्यायपालिका है, संसद है, विशाल हिन्दू समुदाय है, फिर एक छोटी सी चिंगारी... उसे भी अधिवक्ताओं ने कोर्टपरिसर में इतना जम कर पीटा कि बेचारा पैंट गीली कर गया. भला उस अदना से कृषक बालक, जो ३००० रुपये मासिक कमानेवाली आंगनबाड़ी सेविका का जाया है ....इतना डर? मानव संसाधन मंत्री जैसी दुर्गा की अवतार, भक्तों की हुंकार, सबकुछ आपके पास है फिर भी इतना डर? इतना डर तो आतंकवादियों से भी नहीं दिखा था. न ही हरियाणा के जाटों के कुकृत्य.से... माफ़ कीजियेगा अगर कुछ ज्यादा लिख गया तो या डिलीट भी कर सकते हैं. काफी सारे लेख और प्रतिक्रियाओं को पढ़ने के बाद मेरे अंदर से यह प्रतिक्रिया निकली है. अगर समय हो तो मेरा आलेख भी पढ़ लीजियेगा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम रचना जी आप्नेलेख में हर राष्ट्र भक्तो की भावनाओ को व्यक्त किया लोकतंत्र में चुनाव मुद्दों पर लड़े जाते लेकिन आज कल धर्म जाती और एक दुसरे को गली देकर अब देश भक्ति बेकार हो गयी कुर्सी सन कुछ तभी तो कन्हैय्या ऐसे छात्र को जो राष्ट्र विरोधी कार्यक्रम में शामिल हो मीडिया ने हीरो बना दिया मीडिया का एक भाग मोदीजी के विरुद्ध सोनिया भक्त है इसलिए इशरत मामले में भी इशरत का बचाव कर रहा कन्हैय्या को राजनीत में इस्तेमाल करेंगे लेकिन देश के लिए दुर्भाग्य होगा.केजरीवाल,नितीश,राहुल,लालू ममता कुर्सी के लिए देश भी बेच दे.भगवान् रक्षा करे इस देश की इसको अन्दर वालो से ज्यादा खतरा है साधुवाद

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: kavita1980 kavita1980

के द्वारा: pragati pragati

के द्वारा:

                                                   जय श्रीं राम रचनाजी बहुत ही अच्छा लेख लिखा जिसपर हर यहाँ के लेखको को गर्व होना चाइये.देश में इतना ज्ञान भंडार है जिसको हम नहीं इस्तेमाल करते परन्तु विदेशी हारते है.अपने अतीत का इतिहास बहुत अच्छा था परन्तु इसका नाम लेने में टीवी,बुद्धजीवी और सेक्युलर ब्रिगेड भड़क जाती है.आज भारतीय संस्कृत,भाषा,धर्म इतिहास और धरोहरों पर इतनी राजनीती हो रही की भारतीय होने पर शर्म आती है.लार्ड मैकाले ने कहा था की वे ऐसी शिक्षा पद्धति थोप रहा है जिससे भारतीय अंग्रेजो के नीति ,संस्कृति पर चलते बहुत समय तक हमारे जाने के बाद भी हमारे गुण गेट रहेंगे वही सच हुआ.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: deepak pande deepak pande

आलेख में वैचारिक ईमानदारी नहीं झलक रही है। पता नहीं, आप कौन-कौन से इलेक्ट्रानिक न्यूज़ चैनल देख रही हैं। मैं जिन चैनल पर जाता हूं, उन पर तो हर रोज़ मोदी सरकार के कुछ बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। स्वाभाविकतः सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता सरकारी कार्य अपसंस्कृति में अपेक्षित बदलाव लाना है, जंग लग लग कर बरबाद हो रही नौकरशाही को काम पर लगाना है। फैसलों का जहां तक संबंध है, अगर फैसला यह लेना हो कि कल से बिजली के रेट हाफ किये जायेंगे तो ऐसा फैसला तो रात को सोते सोते भी लिया जा सकता है । महत्वपूर्ण फैसला तो यह होता है कि देश का निरंतर बढ़ रहा बजट घाटा कैसे कम किया जाये? देश को प्रगति पथ पर आगे कैसे बढ़ाया जाये। यदि लेखिका को लगता है कि उनके पास सरकार को देने के लिये ठोस सुझाव हैं तो उनका स्वागत है।   

के द्वारा:

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

प्रिय बहन क्या नीचे दिए गए स्टेटमेंट सही है ? अगर ये हालात है तो देश का क्या होगा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर संसदीय सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी इमरान मसूद ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उनको टुकड़े-टुकड़े कर देने की धमकी दी। इस बीच, इमरान मसूद के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। बृहस्पतिवार को चुनाव प्रचार के दौरान समाजवादी पार्टी से कांग्रेस में आए इमरान मसूद ने मोदी को भद्दी-भद्दी गालियां भी दीं। उन्होंने कहा कि मोदी हमारे राज्य को गुजरात बनाना चाहते हैं, लेकिन उसे पता नहीं है कि उसके राज्य में सिर्फ 4 फीसद मुस्लिम हैं, जबकि यहां 42 फीसद। वह मोदी को टुकड़े-टुकड़े कर काट देगा। इस भाषण का वीडियो कई समाचार चैनलों में भी प्रसारित किया गया है। इमरान के चाचा पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद थे। इमरान ने साथ ही कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए बच्चों को दबंग बनाने की वकालत करते हुए कहा कि अगर कानून तोड़ने पर कोई दरोगा उसे [बच्चों को] रोकने की कोशिश करें तो बच्चे भी दरोगा को हड़का सके।

के द्वारा:

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

संसार में जो भी जन्मा है उसका मरण भी निश्चित है लेकिन जन्म का कारण उसका प्रारब्ध है और मृत्यु भी एक निश्चित पूर्व निर्धारित समय स्थान और कारण के अधीन है / अतः मानवदेह में मिला यह जन्म केवल एक ही उद्देश्य से मिला है कि सारे पाप पुण्य कर्मों के फलों से मुक्त होकर सदा के आनंदधाम निवासी बनें और सारे ऋणों को चुकता करने का एकमात्र उपाय मानसिक हरिभजन और हरिस्मरण ही है /मातापिता की शारीरिक सेवा करना धर्म या कर्म नही बल्कि कर्त्तव्य है और यह कर्त्तव्य निसंकोच निस्वार्थ निष्काम निभाना ही मातृ पितृ ऋण उतारना है /बहुत अच्छा लेख.इस अच्छे लेख की और बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक चुने जाने की बधाई.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

प्रिय रचना जी बेस्ट ब्लॉगर के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई....जवाहर जी की प्रतिक्रिया से सहमत होते हुए यही कहूंगी कि वेद(ऋिगवेद) में उल्लिखित सभी कर्म काण्ड या पौराणिक सभी पात्र बेहद प्रतीकात्मक हैं जिनका उद्देश्य किसी दकियानूसी अवधारणा पर नहीं बल्कि एक विशेष उद्देश्य से रखी गई...धर्म के नाम पर अतिरेकता उत्तर वैदिक काल से आनी शुरू हुई और धर्म विकृत होने लगा... अब एक उदहारण ही देखिये महाकाल शिव की तीसरी आँख की जो बात की जाती है वह बेहद प्रतीकात्मक है वह तीसरी आँख हम सब के पास है जो हमारी विवेक बुद्धि है ..ऐसी बहुत सी बातें जो धर्म में कही गईं हैं उनका उद्देश्य एक स्वस्थ सुन्दर समाज की स्थापना था पर हमने कालान्तर में उसमें बहुत अतिरेकता ला कर उसे विद्रूप कर दिया....संतान और अभिभावक का सम्बन्ध किसी कर्म काण्ड के बगैर एक प्रेम मय बंधन है जिसका सम्मान दोनों पक्ष करते हैं तो सब कुछ स्वस्थ सुन्दर और कुदरत के अनुकूल ही रहता है . आप का यह ब्लॉग बहुत ही सराहनीय है आपको पुनः बधाई .

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

के द्वारा:

आपने भी अपनी भड़ास निकाल ली ..यह भी तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ही तो फल है. आम आदमी को ब्यापारी वर्ग, मीडिया, राजनीतिक पार्टियां काफी दिनों से बेवकूफ बना रहा है अब मौका आम आदमी पार्टी को मिला है ...क्या इसी आम आदमी पार्टी ने कहा था - जी भर कर भ्रष्टाचार करो, वातानुकूलित कमरे में बैठकर गरीबों के लिए योजनाएं बनाओ और अपना हिस्सा पहले रख लो. सांसद और विधायक फंड किसलिए? चीजों के दाम बढ़ाते जाओ और गरीबों को मुफ्त अनाज देने की घोषणा भी करो. करोड़ों के मंच से गरीबों की बात ... एक घोषित प्रधान मंत्री पद के दावेदार को भी मीडिया लगातार कवरेज कर रहा है ...यहाँ भी विज्ञापन का ही प्रभाव तो नहीं है! आज आदमी इन्ही मीडिया की बदौलत जगा है नहीं तो दूरदर्शन और रेडिओ केवल सरकारी कार्यक्रमों को ही दिखलाते/सुनाते थे. ... असहा है आप बुरा नहीं मानेंगी मैंने भी अपना विचार व्यक्त किया है. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

भ्रष्टाचार शब्द आज के समय का सबसे अधिक लोकप्रिय शब्द है और जितना यह शब्द आजकल बोला जाता है उतना कोई अन्य नही बोला जाता और वर्ल्ड रिकार्ड बुक वालों को इस ओर ध्यान देना चाहिए /भ्रष्टाचार की गंगा में कुछ लोग अपनी इच्छा से नहाते हैं और कुछ को जबरदस्ती नहाना पड़ता है/दहेज़ देना लोगों को पसंद नही लेकिन दहेज़ लेने से किसी को परहेज भी नही/यही मापदंड इस समाज का हो गया है /बाबा लोग प्रवचन देते हैं की ईमानदारी से जीवन यापन करो, स्वपुरुषार्थ सर्वोत्तम है लेकिन यह उनका उपदेश दूसरों के लिए हैं अपने ऊपर लागू नही करना है /ईमानदारी से अगर कोई जीवन यापन करना भी चाहे तो व्यवस्था ही कुछ ऐसी है कि ईमानदारी से कारोबार या नौकरी कर ही नही सकता क्योंकि नौकरी भी तभी तक जीवित है जब तक ऊपर वाले संतुष्ट हैं और संतुष्टि का एक मात्र अर्थ है उनकी जेब भरना/कारोबारियों पर मिलावट के आरोप लगते हैं लेकिन मिलावट के बिना उनका कारोबार जिन्दा भी नही बचेगा क्योंकि दुनिया भर के टेक्स अगर वह ईमानदारी से अदा भी करना चाहे तो भी अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए भी घूस देनी पड़ेगी/ नाना प्रकार के इंस्पेक्टरों से पिंड ईमानदारी से नही छूटता क्योंकि जिस किसी भी विभाग के इन्स्पेक्टर का नोटिस व्यापारी के पास आ गया ! लोकप्रिय से भी ज्यादा कुत्सित शब्द है ! आपने भारतीय जनमानस और समाज में व्याप्त कुरीतियों को सामने रखकर अपना शानदार ब्लॉग दिया है !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

नैतिक-सांस्कृतिक अधोपतन पर अत्यंत विचारणीय, पठनीय प्रस्तुति, हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! "भारत एक आध्यात्मिक देश है जहाँ भगवान् के अवतारों का वर्णन घर घर में है,घर घर में चमत्कारों की चर्चा होती है यहाँ तक कि नदियों पर्वतों वृक्षों पशुओं पक्षियों को भी भगवान् मानकर पूजा होती है और इसी भारत में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वृक्षों पशुओं पक्षियों की ह्त्या ही नही करते बल्कि उनको खा भी जाते हैं,नदियों में मलमूत्र प्रवाहित करते हैं और पर्वतों को वृक्ष विहीन बनाने पर तुले हैं/ तर्क यह दिया जाता है कि अगर पशु पक्षियों को मारकर खाया न गया तो धरती पर पशु पक्षी ही रह जायेंगे और मनुष्य फिर कहाँ रहेंगे यही कारण है कि आज भारत में जनसँख्या एक सौ पचास करोड़ के लगभग है जिसमे बहुतायत भाग मांसाहारियों का ही है|"

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

के द्वारा:

के द्वारा: nishamittal nishamittal

सुप्रिम‌ कोर्ट के आदॆश कालॆधन पर जजॊ की समिति का गठन से घायल ओर दम्भ से भरी काग्रेस अब क्या करेगी|जजो की जान्च करायेगी कि वो बी.जे.पी या आर अस अस के ऎजेन्ट तो नही,उनकी सम्पति की जाच करायेगी, उनके पासपोर्ट जब्त करेगी, उनकी दुर्घटना करवाएगी या फिर इस आदेश को लोकतन्त्र पर हमला बता कर् देश मे इमर्जैन्सी लागू करेगी| आप्शन ज्यादा नही है| जल्दी करना काग्रेस की लाइफ टाईम समाप्त होने से पहले जवाब चाहिये|मैनॆ पहलॆ ही कहा था कि जुलाई का महीना सरकार कॊ बहुत भारी पडॆगा, यूपीए सरकार कॊ बहुत बडा झटका है यह् यूपीए सरकार आनॆ वालॆ वर्षॊ मॆ भारी कीमत चुकायॆगी पूज्य बाबा रामदॆव कालॆधन वालॆ दैत्यॊ कॆ लियॆ महाकाल है 04 जुलाई 2011 कॊ सच्चा भारतवासी कभी नही भूलॆगा

के द्वारा:

रचना जी बहुत बढ़िया लिखा है आपने.. " राजनीति का मतलब केवल हूकुमत , तानाशाही , सता , नही है ( राजनीति का अर्थ केवल त्याग . सर्मपण , निंस्वार्थ सेवा , कर्तव्यनिष्टा , धर्मनिष्टा . वफादारी . सत्यवादीता . आदि गुणो का आधार राजनीति है ) आजकल तो सफेद कपङे पहनकर अपने अन्दर छिपी काली व भष्ट्र नीति अपनाकर साहुकार कि पदमी लेकर अपने फजीवाङे का प्रदर्शन करते है , समय किसी के बाप कि जागीदारी नही है इतिहास ग्वाह है जब राजा हरिच्रन्द ने सत्य कि परीक्षा मे अपनी पत्नी बच्चे राज पाट का त्याग किया था तो आज भी उनकी पुजा की जाती है राजा कंश का विनाश भी समय आने पर हुआ , लेकिन आज के नेता तो रावण की भुमिका निभा रहे इनका भी समय आ गया है लोकपाल बिल , काले धन की वापसी करो ; तुम क्यो भुलतो हो कि तुम केवल एक मिट्टी के पुतले हो भगवान नही , सुधर जाओ देश भक्तो कि कुबानी याद करो ओर अपनी भुमिका को बदलो नही तो कल उठकर बयानबाजी मे कहोगे कि हमारे देश नक्श्लवाद बढ रहा. (" भष्ट्र नीति का त्याग करो, फिर राजनीति मे कदम रखो वही देश असली कमाण्ङो नेता होगा " )

के द्वारा:

रचनाजी, आपके लेख का तो अब इन्तजार रहने लगा है/ वास्तव में आपके लेख अंतकरण को झंझोर कर देते हैं और सोचने को मजबूर का देते हैं की आप जैसे लोगों को मीडिया में आना चाहिए जिससे पत्रकारिता का स्तर सुधर सके/ चाँद पैसों के लिए गुंडों मवालियों या छुटपैय्यों नेताओं के बयान सुर्ख़ियों में छापे जाते हैं परन्तु आप जैसे सार्थक गंभीर लेखकों का कोई स्थान नही जबकि आप जैसे लेखकों से तो मीडिया को लिखवाना चाहिए/ नैय्यर या खुशवंत जैसे लेखकों जिनको नाटो भाषा ही आती है और न ही लिखने की तमीज या तहजीब उनके लेख तो छापेंगे परन्तु सार्थक और देशप्रेमियों के लेखों का कोई स्थान नही/ खैर लोकतंत्र है क्या कहा जा सकता है/ जिस पर पैसा है वह बड़ा आदमी है आजकल/ डॉ मनोज दुबलिश

के द्वारा:

के द्वारा: संदीप कौशिक संदीप कौशिक

के द्वारा:

रचना जी , वास्तव में आपकी सोच राष्ट्र हित की है/ इतनी बड़ी पार्टी की अध्यक्षा को यह दुस्साहस ही है की विदेशी संस्कृति को हमारे देश में थोप रही है और उनकी पार्टी के लोग गुलामों की तरह उनके चरणों की धुल फांकते हैं/ यही कारण था की भारत पर विदेशी आक्रमण हुए थे और विदेशी यहाँ के बादशाह हुए/ इतिहास पढ़कर भी लोग पुनः वही गलतियाँ करें,तो दोषी कौन हुआ ?जब कांग्रेसियों को एक परिवार के अलावा कुछ दीखता ही नही तो उनकी बुद्धि की क्या कहें ? कांग्रेसियों को आखिर अपना प्रतिशोध व्यक्त करना चाहिए की सोनिया गाँधी पार्टी की अध्यक्षा हैं नाकि उनकी व्यक्तिगत जिंदगी की ? उनका जोर राहुल और प्रुयांजा पर चले तो समझा जा सकता है परन्तु देशवासी उनके कोई गुलाम नही की उनके हुक्मों की तामील करें लेख के लिए बधाई

के द्वारा:

आपने जो विचार व्यक्त किये हैं, वैसा ही विचार इस देश की अस्सी प्रतिशत जनता का है। अगर इस बात का सर्वे कराया जाय कि कितनी जनता इन तथाकथित नेताओं की किसी भी बात पर कितना विश्वास करती है, तो पिचानवे प्रतिशत वोट इस पक्ष में होगा कि  जनता इन पर जरा भी भरोसा नहीं करती। तो फिर ये इस जनता के प्रतिनिधि कैसे हुए। ये तो बेईमानी और भ्रष्ट चुनाव प्रक्रिया के तहत जबरन चुने गये अराजक तत्व हैं, िजनकी सही जगह जेल है। इसीलिये ये लोग न तो कालाधन वापस लाने को इच्छुक हैं, न सशक्त लोकपाल बिल लाने के पक्ष में हैं। ये जनता की नब्ज नहीं पहचान रहे हैं। ये तोच रहे हैं कि यह तो दूध का उफान है, तुरत ठण्ढा हो जायेगा। पर वे भूल कर रहे हैं। किसी को लम्बे समय तक भुलावे में नहीं रखा जा सकता। सवा अरब जनता की नींद खुल रही है। इनके कुशासन का अन्त अब निकट है।

के द्वारा:

रचना जी सही प्रश्न उठाया है आपने ... पर देश भर में आंकड़े कुछ ज्यादा है आप अंदाजा लगा सकती है की 10 दिनों में हमारे गोरखपुर जिले में लगभग 1000 लोग धरने पर बैठे इनमे ६ दिन मै स्वयं बैठा .. पुरे देश में लगभग 7 लाख से ज्यादा लोग धरनों पर बैठे .. और 20 लाख से ज्यादा लोगो ने हस्ताक्षर अभियान में अपना नाम दर्ज कराया ,, करोनो एस एम् एस आये है ... ये सामान्य नहीं है .... जेपी आन्दोलन के बाद ..किसी मुद्दे पर इस तरह से जनसमर्थन को हलके में नहीं ले सकते और 10 दिनों में पुरे देश में लोग जान चुके है की भ्रष्टाचार भी एक मुद्दा है और इसपर हमें सोचना है ... खैर जो प्रश्न आपने उठाया है वो एक दम सही है क्योकि ये आंकड़े किसी परिवर्तन को जन्म नहीं दे सकते .. उनके लिए हमें शःसरीर सामने आन होगा ... ये सब अचानक नहीं होगा पर मेरा अनुभव जो रहा वो ये है की इन धरनों में सामान्य लोग आये मेरे जैसे जो किसी राजनैतिक पार्टी से सम्बंधित नहीं थे .. तो धीरे धीरे चीजे बदलेंगी .. सार्थक सोच के साथ सक्रियता दिखानी पड़ेगी

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY




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